सिंधु घाटी सभ्यता , जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, अपनी ग्रिड प्रणाली पर आधारित सुव्यवस्थित योजना के लिए जानी जाती है। यह एक कांस्य युग की सभ्यता थी, जो वर्तमान के उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत तक विस्तारित थी। इस सभ्यता ने सिंधु और घग्गर-हकरा नदी की घाटियों में विकास किया और यहाँ पर कई महत्वपूर्ण नगरों का निर्माण हुआ। इसके अद्वितीय शहरी नियोजन और जल प्रबंधन प्रणाली ने इसे प्राचीन सभ्यताओं में एक विशेष स्थान दिलाया। हड़प्पा सभ्यता , जिस सभ्यता में अबतक के मिले शहर तथा वहां के ढांचे ने विशेषज्ञों को आश्चर्यचकित किया है। पिछले कुछ समय में, कुछ विशेषज्ञों ने ये भी अनुमान लगाया की हड़प्पा सभ्यता, मेसोपोटामिया सभ्यता से भी पुरानी है और विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। ऐसे में आपको “हड़प्पा सभ्यता इतिहास क्या है” के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। इस ब्लॉग में आप हड़प्पा सभ्यता इतिहास क्या है, हड़प्पा सभ्यता की खोज किसने की, हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल, हड़प्पा सभ्यता की मुहरें, इसकी विशेषता, प्रमुख स्थल और हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी अन्य महत...
बक्सर का युद्ध (1764): कारण, घटनाएँ और महत्व इतिहास आधुनिक भारतीय इतिहास बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर, 1764 को लड़ा गया बक्सर का युद्ध , ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय सहित भारतीय शासकों के गठबंधन के बीच एक निर्णायक युद्ध था। इस विजय ने बंगाल में कंपनी के राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत किया और पूरे भारत में ब्रिटिश विस्तार की नींव रखी। इस लेख का उद्देश्य बक्सर के युद्ध के कारणों, घटनाओं, परिणामों और महत्व का विस्तार से अध्ययन करना है, और यह पता लगाना है कि इस संघर्ष ने भारत में औपनिवेशिक शासन की दिशा कैसे निर्धारित की। बक्सर के युद्ध के बारे में बक्सर के युद्ध के कारण बक्सर के युद्ध की घटनाएँ बक्सर के युद्ध के बाद इलाहाबाद की संधि नवाब शुजा-उद-दौला शाह आलम द्वितीय बक्सर के युद्ध का महत्व निष्कर्ष बक्सर का युद्ध, 22 अक्टूबर 1764 को लड़ा गया, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं और बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजा-उद-दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के नेतृत्व वाले भारतीय शासकों के संयुक्त गठबंधन क...
कैसे कहूं की मां की याद नहीं आती । मुझे तो मां की याद हर रोज आती है सुबह उठते हुए, खाना ना खाने पर 10 बार चिल्लाते हए, कुछ गलतीहुई तो वो पिटाई और फिर खुद ही रोना , नींद ना आने पर वो लोरी, सुबह की चाय, कहीं जाना हो तो मुझे परी की तरह सजाते हुए, मेरे हर एक सुख दुख का ख्याल रखते हुए। (कविता) मां तेरी याद आती हैं । थक्कर घर जाओ तो याद उसी की आती है चोट लगे कभी मुझे जो , तो जुबान पर नाम उसी की आती है । डर लगे कभी मुझे तो वह बातें याद आती है । नींद ना आए कभी मुझे तो वो गोद याद आती है। मां तेरी याद आती है। सरस्वती पासवान